इमरान प्रतापगढ़ी को छोटा सा जवाब
खांग्रेस ही संविधान को बचा सकती है : इमरान प्रतापगढ़ी!
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सुनिए इमरान साहब!
मूल संविधान में आरक्षण के लिए धार्मिक आधार नहीं था, नेहरू ने राष्ट्रपति अध्यादेश के ज़रिए अनुसूचित जाति का आरक्षण 'सिर्फ़ हिंदू' तक सीमित कर दिया! (बाद में सिक्खों और बौद्धों को शामिल किया गया; लेकिन मुस्लिम और ईसाई आज वंचित!).
संविधान ने वादे के मुताबिक कश्मीर को अनुच्छेद 370 के माध्यम से अलग पहचान दी; लेकिन खांग्रेस की सरकारों ने धीरे धीरे मीठे छुरी से अनुच्छेद 370 को ख़त्म कर दिया! भाजपा ने तो सिर्फ घोषणा की!!
संविधान ने 'सबका साथ, सबका विकास, सबको न्याय' की बात की; मगर खांग्रेस के 55 साल के कार्यकाल में हज़ारों मुस्लिम विरोधी दंगे हुए जिसमें हज़ारों मुसलमानों का नरसंहार हुआ और आज तक किसी को सज़ा नहीं मिली!!
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद खांग्रेस-RSS ने मिलकर हज़ारों सिक्खों का नरसंहार किया, उसके बाद हुए आम चुनाव में राजीव गांधी ने संघ की मदद से सत्ता हासिल की और बदले में बाबरी मस्जिद का ताला खोलकर उसमें पूजा की इजाज़त दी!
...फिर इसी खांग्रेस के पीवी नरसिम्हा राव की सरकार ने बाबरी मस्जिद को ध्वस्त होने दिया, जबकि उस वक़्त के गृह सचिव माधव गोडबोले ने कल्याण सिंह की सरकार बर्खास्त कर बाबरी मस्जिद को बचाने का प्रस्ताव कैबिनेट के सामने पेश किया था, लेकिन राव ने कोई फ़ैसला नहीं किया!
इसी खांग्रेस के सत्ता काल में देश का मुसलमान, सरकारी नौकरियों में 35% से 2.5% तक पहुंच गया! और इसी खांग्रेस की यूपीए सरकार ने सच्चर समिति की रिपोर्ट के माध्यम से हिंदुओं को बता दिया कि उसने 55 सालों में मुसलमानों को अर्श से फ़र्श तक पहुंचा दिया है; अब केवल ज़मीन में धसाना बाकी है!!
....और हमारे इमरान प्रतापगढ़ी साहब कहते हैं कि खांग्रेस ही संविधान बचा सकती है!!
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